International Mother Language Day – अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के बारे में रोचक जानकारी

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International Mother Language Day : अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (International Mother Language Day) 21 फरवरी को मनाया जाता है। 17 नवंबर, 1999 को यूनेस्को ने इसे स्वीकृति दी। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य है कि विश्व में भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता और बहुभाषिता को बढ़ावा मिले।

International Mother Language Day

आधुनिक परिदृश्य
भारतीय संविधान निर्माताओं की आकांक्षा थी कि स्वतंत्रता के बाद भारत का शासन अपनी भाषाओं में चले ताकि आम जनता शासन से जुड़ी रहे और समाज में एक सामंजस्य स्थापित हो और सबकी प्रगति हो सके। इसमें कोई शक नहीं कि भारत प्रगति के पथ पर अग्रसर है। पर यह भी सच है कि इस प्रगति का लाभ देश की आम जनता तक पूरी तरह पहुंच नहीं पा रहा है। इसके कारणों की तरफ़ जब हम दृष्टि डालते हैं तो पाते हैं कि शासन को जनता तक उसकी भाषा में पहुंचाने में अभी तक क़ामयाब नहीं हैं।

यह एक प्रमुख कारण है। जब तक इस काम में तेज़ी नहीं आती तब तक किसी भी क्षेत्र में देश की बड़ी से बड़ी उपलब्धि और प्रगति का कोई मूल्य नहीं रह जाता।

International Mother Language Day

अन्तर्राष्ट्रीय मानचित्र पर अंग्रेज़ी के प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता। किन्तु वैश्‍विक दौड़ में आज हिन्दी कहीं भी पीछे नहीं है। यह सिर्फ़ बोलचाल की भाषा ही नहीं, बल्कि सामान्य काम से लेकर इंटरनेट तक के क्षेत्र में इसका प्रयोग बख़ूबी हो रहा है। हमें यह अपेक्षा अवश्य है कि ‘क’ क्षेत्र के शासकीय कार्यालयों में सभी कामकाज हिन्दी में हो। ’ख’ और ’ग’ क्षेत्र में भी निर्धारित प्रतिशत के अनुसार हिन्दी का प्रयोग होता रहे।

માતૃભાષા ગૌરવ ગીત – માતા મારી ગુજરાતી છે…

मातृभाषा
मातृभाषा आदमी के संस्कारों की संवाहक है। मातृभाषा के बिना, किसी भी देश की संस्कृति की कल्पना बेमानी है। मातृभाषा हमें राष्ट्रीयता से जोड़ती है और देश प्रेम की भावना उत्प्रेरित करती है। मातृ भाषा आत्मा की आवाज़ है तथा देश को माला की लड़ियों की तरह पिरोती है। माँ के आंचल में पल्लवित हुई भाषा बालक के मानसिक विकास को शब्द व पहला सम्प्रेषण देती है। मातृ भाषा ही सबसे पहले इंसान को सोचने-समझने और व्यवहार की अनौपचारिक शिक्षा और समझ देती है। बालक की प्राथमिक शिक्षा मातृ भाषा में ही करानी चाहिए।

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भारत के लिए महत्व

भारत ‘अनेकता में एकता’ के सिद्धांत के तहत अपनी सांस्कृतिक विरासत का सदैव आभारी है जिसमें विभिन्न भाषाएं विशेष भूमिका निभाती हैं. भारत में 2001 की जनगणना के अनुसार आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त 22 भाषाएँ, 1635 तर्कसंगत मातृभाषाएँ, 234 पहचान योग्य मातृभाषाएँ मौजूद हैं. यह भारतीय संदर्भ में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाती है.

जनगणना के आंकड़ों के अनुसार 43 करोड़ हिंदी भाषी लोगों में से 12% लोग द्विभाषी हैं इसका मतलब है कि वे लोग दो भाषाएं बोल सकते हैं. उनकी दूसरी भाषा अंग्रेजी है. इसी प्रकार बांग्ला भाषा के 9.7 करोड़ लोगों में 18 प्रतिशत लोग दो भाषाएं बोल सकते हैं.

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पृष्ठभूमि

इस दिवस को मनाये जाने के पीछे ढाका में हुए ऐतिहासिक भाषायी आन्दोलन को श्रेय दिया जाता है. ढाका यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 21 फरवरी 1952 को तत्कालीन पाकिस्तान सरकार की भाषायी नीति का विरोध करते हुए बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शकारियों की सुनने की बजाय पाकिस्तान सरकार ने उनपर गोलियां बरसा दीं.

इतना सब होने के बावजूद भी ढाका के युवा नहीं रुके और उन्होंने अपना प्रदर्शन जारी रखा आखिर सरकार को झुकना पड़ा और बांग्ला भाषा को आधिकारिक दर्जा देना पड़ा. इसे विश्व के सबसे बड़े भाषायी आंदोलन के रूप में जाना जाता है. यूनेस्को ने इस आन्दोलन में शहीद हुए युवाओं की स्मृति में 1999 में 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की, और इस प्रकार इस दिवस की शुरुआत हुई.

International Mother Language Day – Theme 2021

इस साल के अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिन की थीम कुछ इस प्रकार है – “Fostering multilingualism for inclusion in education and society,”

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